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Juz 14 Page 266 / 604 Hizb 27

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 71

    उसने कहा, "तुमको यदि कुछ करना है, तो ये मेरी (क़ौम की) बेटियाँ (विधितः विवाह के लिए) मौजूद है।"

  2. 72

    तुम्हारे जीवन की सौगन्ध, वे अपनी मस्ती में खोए हुए थे,

  3. 73

    अन्ततः पौ फटते-फटते एक भयंकर आवाज़ ने उन्हें आ लिया,

  4. 74

    और हमने उस बस्ती को तलपट कर दिया, और उनपर कंकरीले पत्थर बरसाए

  5. 75

    निश्चय ही इसमें भापनेवालों के लिए निशानियाँ है

  6. 76

    और वह (बस्ती) सार्वजनिक मार्ग पर है

  7. 77

    निश्चय ही इसमें मोमिनों के लिए एक बड़ी निशानी है

  8. 78

    और निश्चय ही ऐसा वाले भी अत्याचारी थे,

  9. 79

    फिर हमने उनसे भी बदला लिया, और ये दोनों (भू-भाग) खुले मार्ग पर स्थित है

  10. 80

    हिज्रवाले भी रसूलों को झुठला चुके है

  11. 81

    हमने तो उन्हें अपनी निशानियाँ प्रदान की थी, परन्तु वे उनकी उपेक्षा ही करते रहे

  12. 82

    वे बड़ी बेफ़िक्री से पहाड़ो को काट-काटकर घर बनाते थे

  13. 83

    अन्ततः एक भयानक आवाज़ ने प्रातः होते- होते उन्हें आ लिया

  14. 84

    फिर जो कुछ वे कमाते रहे, वह उनके कुछ काम न आ सका

  15. 85

    हमने तो आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके मध्य है, सोद्देश्य पैदा किया है, और वह क़ियामत की घड़ी तो अनिवार्यतः आनेवाली है। अतः तुम भली प्रकार दरगुज़र (क्षमा) से काम लो

  16. 86

    निश्चय ही तुम्हारा रब ही बड़ा पैदा करनेवाला, सब कुछ जाननेवाला है

  17. 87

    हमने तुम्हें सात 'मसानी' का समूह यानी महान क़ुरआन दिया-

  18. 88

    जो कुछ सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दी है, तुम उसपर अपनी आँखें न पसारो और न उनपर दुखी हो, तुम तो अपनी भुजाएँ मोमिनों के लिए झुकाए रखो,

  19. 89

    और कह दो, "मैं तो साफ़-साफ़ चेतावनी देनेवाला हूँ।"

  20. 90

    जिस प्रकार हमने हिस्सा-बख़रा करनेवालों पर उतारा था,

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