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Juz 16 Page 311 / 604 Hizb 31

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

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Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 77

    फिर क्या तुमने उस व्यक्ति को देखा जिसने हमारी आयतों का इनकार किया और कहा, "मुझे तो अवश्य ही धन और सन्तान मिलने को है?"

  2. 78

    क्या उसने परोक्ष को झाँककर देख लिया है, या रहमान से कोई वचन ले रखा है?

  3. 79

    कदापि नहीं, हम लिखेंगे जो कुछ वह कहता है और उसके लिए हम यातना को दीर्घ करते चले जाएँगे।

  4. 80

    औऱ जो कुछ वह बताता है उसके वारिस हम होंगे और वह अकेला ही हमारे पास आएगा

  5. 81

    और उन्होंने अल्लाह से इतर अपने कुछ पूज्य-प्रभु बना लिए है, ताकि वे उनके लिए शक्ति का कारण बनें।

  6. 82

    कुछ नहीं, ये उनकी बन्दगी का इनकार करेंगे और उनके विरोधी बन जाएँगे। -

  7. 83

    क्या तुमने देखा नहीं कि हमने शैतानों को छोड़ रखा है, जो इनकार करनेवालों पर नियुक्त है?

  8. 84

    अतः तुम उनके लिए जल्दी न करो। हम तो बस उनके लिए (उनकी बातें) गिन रहे है

  9. 85

    याद करो जिस दिन हम डर रखनेवालों के सम्मानित गिरोह के रूप में रहमान के पास इकट्ठा करेंगे।

  10. 86

    और अपराधियों को जहन्नम के घाट की ओर प्यासा हाँक ले जाएँगे।

  11. 87

    उन्हें सिफ़ारिश का अधिकार प्राप्त न होगा। सिवाय उसके, जिसने रहमान के यहाँ से अनुमोदन प्राप्त कर लिया हो

  12. 88

    वे कहते है, "रहमान ने किसी को अपना बेटा बनाया है।"

  13. 89

    अत्यन्त भारी बात है, जो तुम घड़ लाए हो!

  14. 90

    निकट है कि आकाश इससे फट पड़े और धरती टुकड़े-टुकड़े हो जाए और पहाड़ धमाके के साथ गिर पड़े,

  15. 91

    इस बात पर कि उन्होंने रहमान के लिए बेटा होने का दावा किया!

  16. 92

    जबकि रहमान की प्रतिष्ठा के प्रतिकूल है कि वह किसी को अपना बेटा बनाए

  17. 93

    आकाशों और धरती में जो कोई भी है एक बन्दें के रूप में रहमान के पास आनेवाला है

  18. 94

    उसने उनका आकलन कर रखा है और उन्हें अच्छी तरह गिन रखा है

  19. 95

    और उनमें से प्रत्येक क़ियामत के दिन उस अकेले (रहमान) के सामने उपस्थित होगा

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