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طه · Ayah 14إِنَّنِىٓ أَنَا ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّآ أَنَا۠ فَٱعْبُدْنِى وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ لِذِكْرِىٓ
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طه · Ayah 15إِنَّ ٱلسَّاعَةَ ءَاتِيَةٌ أَكَادُ أُخْفِيهَا لِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا تَسْعَىٰ
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طه · Ayah 16فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَن لَّا يُؤْمِنُ بِهَا وَٱتَّبَعَ هَوَىٰهُ فَتَرْدَىٰ
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طه · Ayah 18قَالَ هِىَ عَصَاىَ أَتَوَكَّؤُا۟ عَلَيْهَا وَأَهُشُّ بِهَا عَلَىٰ غَنَمِى وَلِىَ فِيهَا مَـَٔارِبُ أُخْرَىٰ
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طه · Ayah 21قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ ۖ سَنُعِيدُهَا سِيرَتَهَا ٱلْأُولَىٰ
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طه · Ayah 22وَٱضْمُمْ يَدَكَ إِلَىٰ جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَآءَ مِنْ غَيْرِ سُوٓءٍ ءَايَةً أُخْرَىٰ
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Ayah meanings
Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21
मैंने तुझे चुन लिया है। अतः सुन, जो कुछ प्रकाशना की जाती है
निस्संदेह मैं ही अल्लाह हूँ। मेरे सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः तू मेरी बन्दगी कर और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कर
निश्चय ही वह (क़ियामत की) घड़ी आनेवाली है - शीघ्र ही उसे लाऊँगा, उसे छिपाए रखता हूँ - ताकि प्रत्येक व्यक्ति जो प्रयास वह करता है, उसका बदला पाए
अतः जो कोई उसपर ईमान नहीं लाता और अपनी वासना के पीछे पड़ा है, वह तुझे उससे रोक न दे, अन्यथा तू विनष्ट हो जाएगा
और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है?"
उसने कहा, "यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और इससे मेरी दूसरी ज़रूरतें भी पूरी होती है।"
कहा, "डाल दे उसे, ऐ मूसा!"
अतः उसने डाल दिया। सहसा क्या देखते है कि वह एक साँप है, जो दौड़ रहा है
कहा, "इसे पकड़ ले और डर मत। हम इसे इसकी पहली हालत पर लौटा देंगे
और अपने हाथ अपने बाज़ू की ओर समेट ले। वह बिना किसी ऐब के रौशन दूसरी निशानी के रूप में निकलेगा
इसलिए कि हम तुझे अपनी बड़ी निशानियाँ दिखाएँ
तू फ़िरऔन के पास जा। वह बहुत सरकश हो गया है।"
उसने निवेदन किया, "मेरे रब! मेरा सीना मेरे लिए खोल दे
और मेरे काम को मेरे लिए आसान कर दे
और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे।
कि वे मेरी बात समझ सकें
और मेरे लिए अपने घरवालों में से एक सहायक नियुक्त कर दें,
हारून को, जो मेरा भाई है
उसके द्वारा मेरी कमर मज़बूत कर
और उसे मेरे काम में शरीक कर दें,
कि हम अधिक से अधिक तेरी तसबीह करें
और तुझे ख़ूब याद करें
निश्चय ही तू हमें खूब देख रहा है।"
कहा, "दिया गया तुझे जो तूने माँगा, ऐ मूसा!
हम तो तुझपर एक बार और भी उपकार कर चुके है
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