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Juz 18 Page 342 / 604 Hizb 35
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 1

    सफल हो गए ईमानवाले,

  2. 2

    जो अपनी नमाज़ों में विनम्रता अपनाते है;

  3. 3

    और जो व्यर्थ बातों से पहलू बचाते है;

  4. 4

    और जो ज़कात अदा करते है;

  5. 5

    और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते है-

  6. 6

    सिवाय इस सूरत के कि अपनी पत्नि यों या लौंडियों के पास जाएँ कि इसपर वे निन्दनीय नहीं है

  7. 7

    परन्तु जो कोई इसके अतिरिक्त कुछ और चाहे तो ऐसे ही लोग सीमा उल्लंघन करनेवाले है।-

  8. 8

    और जो अपनी अमानतों और अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखते है;

  9. 9

    और जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं;

  10. 10

    वही वारिस होने वाले है

  11. 11

    जो फ़िरदौस की विरासत पाएँगे। वे उसमें सदैव रहेंगे

  12. 12

    हमने मनुष्य को मिट्टी के सत से बनाया

  13. 13

    फिर हमने उसे एक सुरक्षित ठहरने की जगह टपकी हुई बूँद बनाकर रखा

  14. 14

    फिर हमने उस बूँद को लोथड़े का रूप दिया; फिर हमने उस लोथड़े को बोटी का रूप दिया; फिर हमने उन हड्डियों पर मांस चढाया; फिर हमने उसे एक दूसरा ही सर्जन रूप देकर खड़ा किया। अतः बहुत ही बरकतवाला है अल्लाह, सबसे उत्तम स्रष्टा!

  15. 15

    फिर तुम अवश्य मरनेवाले हो

  16. 16

    फिर क़ियामत के दिन तुम निश्चय ही उठाए जाओगे

  17. 17

    और हमने तुम्हारे ऊपर सात रास्ते बनाए है। और हम सृष्टि-कार्य से ग़ाफ़िल नहीं

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