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Juz 19 Page 367 / 604 Hizb 37
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 1

    ता॰ सीन॰ मीम॰

  2. 2

    ये स्पष्ट किताब की आयतें है

  3. 3

    शायद इसपर कि वे ईमान नहीं लाते, तुम अपने प्राण ही खो बैठोगे

  4. 4

    यदि हम चाहें तो उनपर आकाश से एक निशानी उतार दें। फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ

  5. 5

    उनके पास रहमान की ओर से जो नवीन अनुस्मृति भी आती है, वे उससे मुँह फेर ही लेते है

  6. 6

    अब जबकि वे झुठला चुके है, तो शीघ्र ही उन्हें उसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी, जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते रहे है

  7. 7

    क्या उन्होंने धरती को नहीं देखा कि हमने उसमें कितने ही प्रकार की उमदा चीज़ें पैदा की है?

  8. 8

    निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है, इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

  9. 9

    और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

  10. 10

    और जबकि तुम्हारे रह ने मूसा को पुकारा कि "ज़ालिम लोगों के पास जा -

  11. 11

    फ़िरऔन की क़ौम के पास - क्या वे डर नहीं रखते?"

  12. 12

    उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे डर है कि वे मुझे झुठला देंगे,

  13. 13

    और मेरा सीना घुटता है और मेरी ज़बान नहीं चलती। इसलिए हारून की ओर भी संदेश भेज दे

  14. 14

    और मुझपर उनके यहाँ के एक गुनाह का बोझ भी है। इसलिए मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।"

  15. 15

    कहा, "कदापि नहीं, तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ। हम तुम्हारे साथ है, सुनने को मौजूद है

  16. 16

    अतः तुम दोनो फ़िरऔन को पास जाओ और कहो कि हम सारे संसार के रब के भेजे हुए है

  17. 17

    कि तू इसराईल की सन्तान को हमारे साथ जाने दे।"

  18. 18

    (फ़िरऔन ने) कहा, "क्या हमने तुझे जबकि तू बच्चा था, अपने यहाँ पाला नहीं था? और तू अपनी अवस्था के कई वर्षों तक हमारे साथ रहा,

  19. 19

    और तूने अपना वह काम किया, जो किया। तू बड़ा ही कृतघ्न है।"

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