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Juz 19 Page 370 / 604 Hizb 37

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 61

    फिर जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया तो मूसा के साथियों ने कहा, "हम तो पकड़े गए!"

  2. 62

    उसने कहा, "कदापि नहीं, मेरे साथ मेरा रब है। वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा।"

  3. 63

    तब हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "अपनी लाठी सागर पर मार।"

  4. 64

    और हम दूसरों को भी निकट ले आए

  5. 65

    हमने मूसा को और उन सबको जो उसके साथ थे, बचा लिया

  6. 66

    और दूसरों को डूबो दिया

  7. 67

    निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

  8. 68

    और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

  9. 69

    और उन्हें इबराहीम का वृत्तान्त सुनाओ,

  10. 70

    जबकि उसने अपने बाप और अपनी क़ौंम के लोगों से कहा, "तुम क्या पूजते हो?"

  11. 71

    उन्होंने कहा, "हम बुतों की पूजा करते है, हम तो उन्हीं की सेवा में लगे रहेंगे।"

  12. 72

    उसने कहा, "क्या ये तुम्हारी सुनते है, जब तुम पुकारते हो,

  13. 73

    या ये तुम्हें कुछ लाभ या हानि पहुँचाते है?"

  14. 74

    उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हमने तो अपने बाप-दादा को ऐसा ही करते पाया है।"

  15. 75

    उसने कहा, "क्या तुमने उनपर विचार भी किया कि जिन्हें तुम पूजते हो,

  16. 76

    तुम और तुम्हारे पहले के बाप-दादा?

  17. 77

    वे सब तो मेरे शत्रु है, सिवाय सारे संसार के रब के,

  18. 78

    जिसने मुझे पैदा किया और फिर वही मेरा मार्गदर्शन करता है

  19. 79

    और वही है जो मुझे खिलाता और पिलाता है

  20. 80

    और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे अच्छा करता है

  21. 81

    और वही है जो मुझे मारेगा, फिर मुझे जीवित करेगा

  22. 82

    और वही है जिससे मुझे इसकी आकांक्षा है कि बदला दिए जाने के दिन वह मेरी ख़ता माफ़ कर देगा

  23. 83

    ऐ मेरे रब! मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान कर और मुझे योग्य लोगों के साथ मिला।

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