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الشعراء · Ayah 113إِنْ حِسَابُهُمْ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّى ۖ لَوْ تَشْعُرُونَ
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الشعراء · Ayah 116قَالُوا۟ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ يَـٰنُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلْمَرْجُومِينَ
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الشعراء · Ayah 118فَٱفْتَحْ بَيْنِى وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّنِى وَمَن مَّعِىَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
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الشعراء · Ayah 119فَأَنجَيْنَـٰهُ وَمَن مَّعَهُۥ فِى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ
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الشعراء · Ayah 121إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
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الشعراء · Ayah 127وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
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الشعراء · Ayah 136قَالُوا۟ سَوَآءٌ عَلَيْنَآ أَوَعَظْتَ أَمْ لَمْ تَكُن مِّنَ ٱلْوَٰعِظِينَ
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Ayah meanings
Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21
उसने कहा, "मुझे क्या मालूम कि वे क्या करते रहे है?
उनका हिसाब तो बस मेरे रब के ज़िम्मे है। क्या ही अच्छा होता कि तुममें चेतना होती।
और मैं ईमानवालों को धुत्कारनेवाला नहीं हूँ।
मैं तो बस स्पष्ट रूप से एक सावधान करनेवाला हूँ।"
उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया ऐ नूह, तो तू संगसार होकर रहेगा।"
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मेरी क़ौम के लोगों ने तो मुझे झुठला दिया
अब मेरे और उनके बीच दो टूक फ़ैसला कर दे और मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ है, उन्हें बचा ले!"
अतः हमने उसे और जो उसके साथ भरी हुई नौका में थे बचा लिया
और उसके पश्चात शेष लोगों को डूबो दिया
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
आद ने रसूलों को झूठलाया
जबकि उनके भाई हूद ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?
मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा मानो
मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़ि्म्मे है।
क्या तुम प्रत्येक उच्च स्थान पर व्यर्थ एक स्मारक का निर्माण करते रहोगे?
और भव्य महल बनाते रहोगे, मानो तुम्हें सदैव रहना है?
और जब किसी पर हाथ डालते हो तो बिलकुल निर्दय अत्याचारी बनकर हाथ डालते हो!
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
उसका डर रखो जिसने तुम्हें वे चीज़े पहुँचाई जिनको तुम जानते हो
उसने तुम्हारी सहायता की चौपायों और बेटों से,
और बाग़ो और स्रोतो से
निश्चय ही मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े दिन की यातना का भय है।"
उन्होंने कहा, "हमारे लिए बराबर है चाहे तुम नसीहत करो या नसीहत करने वाले न बनो।
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