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Juz 19 Page 372 / 604 Hizb 38

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

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Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 112

    उसने कहा, "मुझे क्या मालूम कि वे क्या करते रहे है?

  2. 113

    उनका हिसाब तो बस मेरे रब के ज़िम्मे है। क्या ही अच्छा होता कि तुममें चेतना होती।

  3. 114

    और मैं ईमानवालों को धुत्कारनेवाला नहीं हूँ।

  4. 115

    मैं तो बस स्पष्ट रूप से एक सावधान करनेवाला हूँ।"

  5. 116

    उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया ऐ नूह, तो तू संगसार होकर रहेगा।"

  6. 117

    उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मेरी क़ौम के लोगों ने तो मुझे झुठला दिया

  7. 118

    अब मेरे और उनके बीच दो टूक फ़ैसला कर दे और मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ है, उन्हें बचा ले!"

  8. 119

    अतः हमने उसे और जो उसके साथ भरी हुई नौका में थे बचा लिया

  9. 120

    और उसके पश्चात शेष लोगों को डूबो दिया

  10. 121

    निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

  11. 122

    और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

  12. 123

    आद ने रसूलों को झूठलाया

  13. 124

    जबकि उनके भाई हूद ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?

  14. 125

    मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ

  15. 126

    अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा मानो

  16. 127

    मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़ि्म्मे है।

  17. 128

    क्या तुम प्रत्येक उच्च स्थान पर व्यर्थ एक स्मारक का निर्माण करते रहोगे?

  18. 129

    और भव्य महल बनाते रहोगे, मानो तुम्हें सदैव रहना है?

  19. 130

    और जब किसी पर हाथ डालते हो तो बिलकुल निर्दय अत्याचारी बनकर हाथ डालते हो!

  20. 131

    अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो

  21. 132

    उसका डर रखो जिसने तुम्हें वे चीज़े पहुँचाई जिनको तुम जानते हो

  22. 133

    उसने तुम्हारी सहायता की चौपायों और बेटों से,

  23. 134

    और बाग़ो और स्रोतो से

  24. 135

    निश्चय ही मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े दिन की यातना का भय है।"

  25. 136

    उन्होंने कहा, "हमारे लिए बराबर है चाहे तुम नसीहत करो या नसीहत करने वाले न बनो।

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