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Juz 19 Page 375 / 604 Hizb 38

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 184

    उसका डर रखो जिसने तुम्हें और पिछली नस्लों को पैदा किया हैं।"

  2. 185

    उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है

  3. 186

    और तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है और हम तो तुझे झूठा समझते है

  4. 187

    फिर तू हमपर आकाश को कोई टुकड़ा गिरा दे, यदि तू सच्चा है।"

  5. 188

    उसने कहा, " मेरा रब भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो।"

  6. 189

    किन्तु उन्होंने उसे झुठला दिया। फिर छायावाले दिन की यातना ने आ लिया। निश्चय ही वह एक बड़े दिन की यातना थी

  7. 190

    निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

  8. 191

    और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

  9. 192

    निश्चय ही यह (क़ुरआन) सारे संसार के रब की अवतरित की हुई चीज़ है

  10. 193

    इसको लेकर तुम्हारे हृदय पर एक विश्वसनीय आत्मा उतरी है,

  11. 194

    ताकि तुम सावधान करनेवाले हो

  12. 195

    स्पष्ट अरबी भाषा में

  13. 196

    और निस्संदेह यह पिछले लोगों की किताबों में भी मौजूद है

  14. 197

    क्या यह उनके लिए कोई निशानी नहीं है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान जानते है?

  15. 198

    यदि हम इसे ग़ैर अरबी भाषी पर भी उतारते,

  16. 199

    और वह इसे उन्हें पढ़कर सुनाता तब भी वे इसे माननेवाले न होते

  17. 200

    इसी प्रकार हमने इसे अपराधियों के दिलों में पैठाया है

  18. 201

    वे इसपर ईमान लाने को नहीं, जब तक कि दुखद यातना न देख लें

  19. 202

    फिर जब वह अचानक उनपर आ जाएगी और उन्हें ख़बर भी न होगी,

  20. 203

    तब वे कहेंगे, "क्या हमें कुछ मुहलत मिल सकती है?"

  21. 204

    तो क्या वे लोग हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे है?

  22. 205

    क्या तुमने कुछ विचार किया? यदि हम उन्हें कुछ वर्षों तक सुख भोगने दें;

  23. 206

    फिर उनपर वह चीज़ आ जाए, जिससे उन्हें डराया जाता रहा है;

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