Al Madinah Quran
Language
The Poets Page 376
Home
Juz 19 Page 376 / 604 Hizb 38
Surah النمل

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 207

    तो जो सुख उन्हें मिला होगा वह उनके कुछ काम न आएगा

  2. 208

    हमने किसी बस्ती को भी इसके बिना विनष्ट नहीं किया कि उसके लिए सचेत करनेवाले याददिहानी के लिए मौजूद रहे हैं।

  3. 209

    हम कोई ज़ालिम नहीं है

  4. 210

    इसे शैतान लेकर नहीं उतरे हैं।

  5. 211

    न यह उन्हें फबता ही है और न ये उनके बस का ही है

  6. 212

    वे तो इसके सुनने से भी दूर रखे गए है

  7. 213

    अतः अल्लाह के साथ दूसरे इष्ट-पूज्य को न पुकारना, अन्यथा तुम्हें भी यातना दी जाएगी

  8. 214

    और अपने निकटतम नातेदारों को सचेत करो

  9. 215

    और जो ईमानवाले तुम्हारे अनुयायी हो गए है, उनके लिए अपनी भुजाएँ बिछाए रखो

  10. 216

    किन्तु यदि वे तुम्हारी अवज्ञा करें तो कह दो, "जो कुछ तुम करते हो, उसकी ज़िम्मेदारी से मं1 बरी हूँ।"

  11. 217

    और उस प्रभुत्वशाली और दया करनेवाले पर भरोसा रखो

  12. 218

    जो तुम्हें देख रहा होता है, जब तुम खड़े होते हो

  13. 219

    और सजदा करनेवालों में तुम्हारे चलत-फिरत को भी वह देखता है

  14. 220

    निस्संदेह वह भली-भाँति सुनता-जानता है

  15. 221

    क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि शैतान किसपर उतरते है?

  16. 222

    वे प्रत्येक ढोंग रचनेवाले गुनाहगार पर उतरते है

  17. 223

    वे कान लगाते है और उनमें से अधिकतर झूठे होते है

  18. 224

    रहे कवि, तो उनके पीछे बहके हुए लोग ही चला करते है।-

  19. 225

    क्या तुमने देखा नहीं कि वे हर घाटी में बहके फिरते हैं,

  20. 226

    और कहते वह है जो करते नहीं? -

  21. 227

    वे नहीं जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और अल्लाह को अधिक .याद किया। औऱ इसके बाद कि उनपर ज़ुल्म किया गया तो उन्होंने उसका प्रतिकार किया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया, उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा कि वे किस जगह पलटते हैं

Reading

Display settings

Quran text size
Appearance
0:00/0:00