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Juz 23 Page 448 / 604 Hizb 45

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 52

    जो कहा करता था क्या तुम भी पुष्टि करनेवालों में से हो?

  2. 53

    क्या जब हम मर चुके होंगे और मिट्टी और हड्डियाँ होकर रह जाएँगे, तो क्या हम वास्तव में बदला पाएँगे?"

  3. 54

    वह कहेगा, "क्या तुम झाँककर देखोगे?"

  4. 55

    फिर वह झाँकेगा तो उसे भड़कती हुई आग के बीच में देखेगा

  5. 56

    कहेगा, "अल्लाह की क़सम! तुम तो मुझे तबाह ही करने को थे

  6. 57

    यदि मेरे रब की अनुकम्पा न होती तो अवश्य ही मैं भी पकड़कर हाज़िर किए गए लोगों में से होता

  7. 58

    है ना अब ऐसा कि हम मरने के नहीं।

  8. 59

    हमें जो मृत्यु आनी थी वह बस पहले आ चुकी। और हमें कोई यातना ही दी जाएगी!"

  9. 60

    निश्चय ही यही बड़ी सफलता है

  10. 61

    ऐसी की चीज़ के लिए कर्म करनेवालों को कर्म करना चाहिए

  11. 62

    क्या वह आतिथ्य अच्छा है या 'ज़क़्क़ूम' का वृक्ष?

  12. 63

    निश्चय ही हमने उस (वृक्ष) को ज़ालिमों के लिए परीक्षा बना दिया है

  13. 64

    वह एक वृक्ष है जो भड़कती हुई आग की तह से निकलता है

  14. 65

    उसके गाभे मानो शैतानों के सिर (साँपों के फन) है

  15. 66

    तो वे उसे खाएँगे और उसी से पेट भरेंगे

  16. 67

    फिर उनके लिए उसपर खौलते हुए पानी का मिश्रण होगा

  17. 68

    फिर उनकी वापसी भड़कती हुई आग की ओर होगी

  18. 69

    निश्चय ही उन्होंने अपने बाप-दादा को पथभ्रष्ट॥ पाया।

  19. 70

    फिर वे उन्हीं के पद-चिन्हों पर दौड़ते रहे

  20. 71

    और उनसे पहले भी पूर्ववर्ती लोगों में अधिकांश पथभ्रष्ट हो चुके है,

  21. 72

    हमने उनमें सचेत करनेवाले भेजे थे।

  22. 73

    तो अब देख लो उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ, जिन्हे सचेत किया गया था

  23. 74

    अलबत्ता अल्लाह के बन्दों की बात और है, जिनको उसने चुन लिया है

  24. 75

    नूह ने हमको पुकारा था, तो हम कैसे अच्छे है निवेदन स्वीकार करनेवाले!

  25. 76

    हमने उसे और उसके लोगों को बड़ी घुटन और बेचैनी से छुटकारा दिया

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