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الصافات · Ayah 97قَالُوا۟ ٱبْنُوا۟ لَهُۥ بُنْيَـٰنًا فَأَلْقُوهُ فِى ٱلْجَحِيمِ
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الصافات · Ayah 98فَأَرَادُوا۟ بِهِۦ كَيْدًا فَجَعَلْنَـٰهُمُ ٱلْأَسْفَلِينَ
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الصافات · Ayah 102فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعْىَ قَالَ يَـٰبُنَىَّ إِنِّىٓ أَرَىٰ فِى ٱلْمَنَامِ أَنِّىٓ أَذْبَحُكَ فَٱنظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَـٰٓأَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّـٰبِرِينَ
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Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21
और हमने उसकी सतति (औलाद व अनुयायी) ही को बाक़ी रखा
और हमने पीछे आनेवाली नस्लों में उसका अच्छा ज़िक्र छोड़ा
कि "सलाम है नूह पर सम्पूर्ण संसारवालों में!"
निस्संदेह हम उत्तमकारों को ऐसा बदला देते है
निश्चय ही वह हमारे ईमानवाले बन्दों में से था
फिर हमने दूसरो को डूबो दिया।
और इबराहीम भी उसी के सहधर्मियों में से था।
याद करो, जब वह अपने रब के समक्ष भला-चंगा हृदय लेकर आया;
जबकि उसने अपने बाप और अपनी क़ौम के लोगों से कहा, "तुम किस चीज़ की पूजा करते हो?
क्या अल्लाह से हटकर मनघड़ंत उपास्यों को चाह रहे हो?
आख़िर सारे संसार के रब के विषय में तुम्हारा क्या गुमान है?"
फिर उसने एक दृष्टि तारों पर डाली
और कहा, "मैं तो निढाल हूँ।"
अतएव वे उसे छोड़कर चले गए पीठ फेरकर
फिर वह आँख बचाकर उनके देवताओं की ओर गया और कहा, "क्या तुम खाते नहीं?
तुम्हें क्या हुआ है कि तुम बोलते नहीं?"
फिर वह भरपूर हाथ मारते हुए उनपर पिल पड़ा
फिर वे लोग झपटते हुए उसकी ओर आए
उसने कहा, "क्या तुम उनको पूजते हो, जिन्हें स्वयं तराशते हो,
जबकि अल्लाह ने तुम्हे भी पैदा किया है और उनको भी, जिन्हें तुम बनाते हो?"
वे बोले, "उनके लिए एक मकान (अर्थात अग्नि-कुंड) तैयार करके उसे भड़कती आग में डाल दो!"
अतः उन्होंने उसके साथ एक चाल चलनी चाही, किन्तु हमने उन्हीं को नीचा दिखा दिया
उसने कहा, "मैं अपने रब की ओर जा रहा हूँ, वह मेरा मार्गदर्शन करेगा
ऐ मेरे रब! मुझे कोई नेक संतान प्रदान कर।"
तो हमने उसे एक सहनशील पुत्र की शुभ सूचना दी
फिर जब वह उसके साथ दौड़-धूप करने की अवस्था को पहुँचा तो उसने कहा, "ऐ मेरे प्रिय बेटे! मैं स्वप्न में देखता हूँ कि तुझे क़ुरबान कर रहा हूँ। तो अब देख, तेरा क्या विचार है?" उसने कहा, "ऐ मेरे बाप! जो कुछ आपको आदेश दिया जा रहा है उसे कर डालिए। अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे धैर्यवान पाएँगे।"
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