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ص · Ayah 3كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّن قَرْنٍ فَنَادَوا۟ وَّلَاتَ حِينَ مَنَاصٍ
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ص · Ayah 4وَعَجِبُوٓا۟ أَن جَآءَهُم مُّنذِرٌ مِّنْهُمْ ۖ وَقَالَ ٱلْكَـٰفِرُونَ هَـٰذَا سَـٰحِرٌ كَذَّابٌ
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ص · Ayah 5أَجَعَلَ ٱلْـَٔالِهَةَ إِلَـٰهًا وَٰحِدًا ۖ إِنَّ هَـٰذَا لَشَىْءٌ عُجَابٌ
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ص · Ayah 6وَٱنطَلَقَ ٱلْمَلَأُ مِنْهُمْ أَنِ ٱمْشُوا۟ وَٱصْبِرُوا۟ عَلَىٰٓ ءَالِهَتِكُمْ ۖ إِنَّ هَـٰذَا لَشَىْءٌ يُرَادُ
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ص · Ayah 7مَا سَمِعْنَا بِهَـٰذَا فِى ٱلْمِلَّةِ ٱلْـَٔاخِرَةِ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا ٱخْتِلَـٰقٌ
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ص · Ayah 8أَءُنزِلَ عَلَيْهِ ٱلذِّكْرُ مِنۢ بَيْنِنَا ۚ بَلْ هُمْ فِى شَكٍّ مِّن ذِكْرِى ۖ بَل لَّمَّا يَذُوقُوا۟ عَذَابِ
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ص · Ayah 9أَمْ عِندَهُمْ خَزَآئِنُ رَحْمَةِ رَبِّكَ ٱلْعَزِيزِ ٱلْوَهَّابِ
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ص · Ayah 10أَمْ لَهُم مُّلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ فَلْيَرْتَقُوا۟ فِى ٱلْأَسْبَـٰبِ
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ص · Ayah 12كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ ذُو ٱلْأَوْتَادِ
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ص · Ayah 13وَثَمُودُ وَقَوْمُ لُوطٍ وَأَصْحَـٰبُ لْـَٔيْكَةِ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلْأَحْزَابُ
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ص · Ayah 15وَمَا يَنظُرُ هَـٰٓؤُلَآءِ إِلَّا صَيْحَةً وَٰحِدَةً مَّا لَهَا مِن فَوَاقٍ
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ص · Ayah 16وَقَالُوا۟ رَبَّنَا عَجِّل لَّنَا قِطَّنَا قَبْلَ يَوْمِ ٱلْحِسَابِ
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Ayah meanings
Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21
साद। क़सम है, याददिहानी-वाले क़ुरआन की (जिसमें कोई कमी नहीं कि धर्मविरोधी सत्य को न समझ सकें)
बल्कि जिन्होंने इनकार किया वे गर्व और विरोध में पड़े हुए है
उनसे पहले हमने कितनी ही पीढ़ियों को विनष्ट किया, तो वे लगे पुकारने। किन्तु वह समय हटने-बचने का न था
उन्होंने आश्चर्य किया इसपर कि उनके पास उन्हीं में से एक सचेतकर्ता आया और इनकार करनेवाले कहने लगे, "यह जादूगर है बड़ा झूठा
क्या उसने सारे उपास्यों को अकेला एक उपास्य ठहरा दिया? निस्संदेह यह तो बहुत अचम्भेवाली चीज़ है!"
और उनके सरदार (यह कहते हुए) चल खड़े हुए कि "चलते रहो और अपने उपास्यों पर जमें रहो। निस्संदेह यह वांछिच चीज़ है
यह बात तो हमने पिछले धर्म में सुनी ही नहीं। यह तो बस मनघड़त है
क्या हम सबमें से (चुनकर) इसी पर अनुस्मृति अवतरित हुई है?" नहीं, बल्कि वे मेरी अनुस्मृति के विषय में संदेह में है, बल्कि उन्होंने अभी तक मेरी यातना का मज़ा चखा ही नहीं है
या, तेरे प्रभुत्वशाली, बड़े दाता रब की दयालुता के ख़ज़ाने उनके पास है?
या, आकाशों और धरती और जो कुछ उनके बीच है, उन सबकी बादशाही उन्हीं की है? फिर तो चाहिए कि वे रस्सियों द्वारा ऊपर चढ़ जाए
वह एक साधारण सेना है (विनष्ट होनेवाले) दलों में से, वहाँ मात खाना जिसकी नियति है
उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और मेखोंवाले फ़िरऔन ने झुठलाया
और समूद और लूत की क़ौम और 'ऐकावाले' भी, ये है वे दल
उनमें से प्रत्येक ने रसूलों को झुठलाया, तो मेरी ओर से दंड अवश्यम्भावी होकर रहा
इन्हें बस एक चीख की प्रतीक्षा है जिसमें तनिक भी अवकाश न होगा
वे कहते है, "ऐ हमारे रब! हिसाब के दिन से पहले ही शीघ्र हमारा हिस्सा दे दे।"
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