Al Madinah Quran
Language
The letter Qaaf Page 520
Home
Juz 26 Page 520 / 604 Hizb 52
Surah الذاريات
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 36

    उनसे पहले हम कितनी ही नस्लों को विनष्ट कर चुके है। वे लोग शक्ति में उनसे कहीं बढ़-चढ़कर थे। (पनाह की तलाश में) उन्होंने नगरों को छान मारा, कोई है भागने को ठिकाना?

  2. 37

    निश्चय ही इसमें उस व्यक्ति के लिए शिक्षा-सामग्री है जिसके पास दिल हो या वह (दिल से) हाजिर रहकर कान लगाए

  3. 38

    हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है छः दिनों में पैदा कर दिया और हमें कोई थकान न छू सकी

  4. 39

    अतः जो कुछ वे कहते है उसपर धैर्य से काम लो और अपने रब की प्रशंसा की तसबीह करो; सूर्योदय से पूर्व और सूर्यास्त के पूर्व,

  5. 40

    और रात की घड़ियों में फिर उसकी तसबीह करो और सजदों के पश्चात भी

  6. 41

    और कान लगाकर सुन लेगा जिस दिन पुकारनेवाला अत्यन्त निकट के स्थान से पुकारेगा,

  7. 42

    जिस दिन लोग भयंकर चीख़ को सत्यतः सुन रहे होंगे। वही दिन होगा निकलने का।-

  8. 43

    हम ही जीलन प्रदान करते और मृत्यु देते है और हमारी ही ओर अन्ततः आना है। -

  9. 44

    जिस दिन धरती उनपर से फट जाएगी और वे तेजी से निकल पड़ेंगे। यह इकट्ठा करना हमारे लिए अत्यन्त सरल है

  10. 45

    हम जानते है जो कुछ वे कहते है, तुम उनपर कोई ज़बरदस्ती करनेवाले तो हो नहीं। अतः तुम क़ुरआन के द्वारा उसे नसीहत करो जो हमारी चेतावनी से डरे

  11. 1

    गवाह है (हवाएँ) जो गर्द-ग़ुबार उड़ाती फिरती है;

  12. 2

    फिर बोझ उठाती है;

  13. 3

    फिर नरमी से चलती है;

  14. 4

    फिर मामले को अलग-अलग करती है;

  15. 5

    निश्चय ही तुमसे जिस चीज़ का वादा किया जाता है, वह सत्य है;

  16. 6

    और (कर्मों का) बदला अवश्य सामने आकर रहेगा

Reading

Display settings

Quran text size
Appearance
0:00/0:00