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Juz 27 Page 523 / 604 Hizb 53
Surah الطور
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 52

    इसी तरह उन लोगों के पास भी, जो उनसे पहले गुज़र चुके है, जो भी रसूल आया तो उन्होंने बस यही कहा, "जादूगर है या दीवाना!"

  2. 53

    क्या उन्होंने एक-दूसरे को इसकी वसीयत कर रखी है? नहीं, बल्कि वे है ही सरकश लोग

  3. 54

    अतः उनसे मुँह फेर लो अब तुमपर कोई मलामत नहीं

  4. 55

    और याद दिलाते रहो, क्योंकि याद दिलाना ईमानवालों को लाभ पहुँचाता है

  5. 56

    मैंने तो जिन्नों और मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी बन्दगी करे

  6. 57

    मैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ

  7. 58

    निश्चय ही अल्लाह ही है रोज़ी देनेवाला, शक्तिशाली, दृढ़

  8. 59

    अतः जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके लिए एक नियत पैमाना है; जैसा उनके साथियों का नियत पैमाना था। अतः वे मुझसे जल्दी न मचाएँ!

  9. 60

    अतः इनकार करनेवालों के लिए बड़ी खराबी है, उनके उस दिन के कारण जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही है

  10. 1

    गवाह है तूर पर्वत,

  11. 2

    और लिखी हुई किताब;

  12. 3

    फैले हुए झिल्ली के पन्ने में

  13. 4

    और बसा हुआ घर;

  14. 5

    और ऊँची छत;

  15. 6

    और उफनता समुद्र

  16. 7

    कि तेरे रब की यातना अवश्य घटित होकर रहेगी;

  17. 8

    जिसे टालनेवाला कोई नहीं;

  18. 9

    जिस दिल आकाश बुरी तरह डगमगाएगा;

  19. 10

    और पहाड़ चलते-फिरते होंगे;

  20. 11

    तो तबाही है उस दिन, झुठलानेवालों के लिए;

  21. 12

    जो बात बनाने में लगे हुए खेल रहे है

  22. 13

    जिस दिन वे धक्के दे-देकर जहन्नम की ओर ढकेले जाएँगे

  23. 14

    (कहा जाएगा), "यही है वह आग जिसे तुम झुठलाते थे

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