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Juz 27 Page 525 / 604 Hizb 53
Surah النجم

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 32

    या उनकी बुद्धियाँ यही आदेश दे रही है, या वे ही है सरकश लोग?

  2. 33

    या वे कहते है, "उसने उस (क़ुरआन) को स्वयं ही कह लिया है?" नहीं, बल्कि वे ईमान नहीं लाते

  3. 34

    अच्छा यदि वे सच्चे है तो उन्हें उस जैसी वाणी ले आनी चाहिए

  4. 35

    या वे बिना किसी चीज़ के पैदा हो गए? या वे स्वयं ही अपने स्रष्टाँ है?

  5. 36

    या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया?

  6. 37

    या उनके पास तुम्हारे रब के खज़ाने है? या वही उनके परिरक्षक है?

  7. 38

    या उनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़कर वे (कान लगाकर) सुन लेते है? फिर उनमें से जिसने सुन लिया हो तो वह ले आए स्पष्ट प्रमाण

  8. 39

    या उस (अल्लाह) के लिए बेटियाँ है और तुम्हारे अपने लिए बेटे?

  9. 40

    या तुम उनसे कोई पारिश्रामिक माँगते हो कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे है?

  10. 41

    या उनके पास परोक्ष (स्पष्ट) है जिसके आधार पर वे लिए रहे हो?

  11. 42

    या वे कोई चाल चलना चाहते है? तो जिन लोगों ने इनकार किया वही चाल की लपेट में आनेवाले है

  12. 43

    या अल्लाह के अतिरिक्त उनका कोई और पूज्य-प्रभु है? अल्लाह महान और उच्च है उससे जो वे साझी ठहराते है

  13. 44

    यदि वे आकाश का कोई टुकटा गिरता हुआ देखें तो कहेंगे, "यह तो परत पर परत बादल है!"

  14. 45

    अतः छोडो उन्हें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन का सामना करें जिसमें उनपर वज्रपात होगा;

  15. 46

    जिस दिन उनकी चाल उनके कुछ भी काम न आएगी और न उन्हें कोई सहायता ही मिलेगी;

  16. 47

    और निश्चय ही जिन लोगों ने ज़ुल्म किया उनके लिए एक यातना है उससे हटकर भी, परन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं

  17. 48

    अपने रब का फ़ैसला आने तक धैर्य से काम लो, तुम तो हमारी आँखों में हो, और जब उठो तो अपने रब का गुणगान करो;

  18. 49

    रात की कुछ घड़ियों में भी उसकी तसबीह करो, और सितारों के पीठ फेरने के समय (प्रातःकाल) भी

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