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النجم · Ayah 23إِنْ هِىَ إِلَّآ أَسْمَآءٌ سَمَّيْتُمُوهَآ أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُم مَّآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَـٰنٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَمَا تَهْوَى ٱلْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ ٱلْهُدَىٰٓ
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النجم · Ayah 26وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ لَا تُغْنِى شَفَـٰعَتُهُمْ شَيْـًٔا إِلَّا مِنۢ بَعْدِ أَن يَأْذَنَ ٱللَّهُ لِمَن يَشَآءُ وَيَرْضَىٰٓ
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Ayah meanings
Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21
गवाह है तारा, जब वह नीचे को आए
तुम्हारी साथी (मुहम्मह सल्ल॰) न गुमराह हुआ और न बहका;
और न वह अपनी इच्छा से बोलता है;
वह तो बस एक प्रकाशना है, जो की जा रही है
उसे बड़ी शक्तियोंवाले ने सिखाया,
स्थिर रीतिवाले ने।
अतः वह भरपूर हुआ, इस हाल में कि वह क्षितिज के उच्चतम छोर पर है
फिर वह निकट हुआ और उतर गया
अब दो कमानों के बराबर या उससे भी अधिक निकट हो गया
तब उसने अपने बन्दे की ओर प्रकाशना की, जो कुछ प्रकाशना की।
दिल ने कोई धोखा नहीं दिया, जो कुछ उसने देखा;
अब क्या तुम उस चीज़ पर झगड़ते हो, जिसे वह देख रहा है? -
और निश्चय ही वह उसे एक बार और
'सिदरतुल मुन्तहा' (परली सीमा के बेर) के पास उतरते देख चुका है
उसी के निकट 'जन्नतुल मावा' (ठिकानेवाली जन्नत) है। -
जबकि छा रहा था उस बेर पर, जो कुछ छा रहा था
निगाह न तो टेढ़ी हुइ और न हद से आगे बढ़ी
निश्चय ही उसने अपने रब की बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखीं
तो क्या तुमने लात और उज़्ज़ा
और तीसरी एक और (देवी) मनात पर विचार किया?
क्या तुम्हारे लिए तो बेटे है उनके लिए बेटियाँ?
तब तो यह बहुत बेढ़ंगा और अन्यायपूर्ण बँटवारा हुआ!
वे तो बस कुछ नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए है। अल्लाह ने उनके लिए कोई सनद नहीं उतारी। वे तो केवल अटकल के पीछे चले रहे है और उनके पीछे जो उनके मन की इच्छा होती है। हालाँकि उनके पास उनके रब की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है
(क्या उनकी देवियाँ उन्हें लाभ पहुँचा सकती है) या मनुष्य वह कुछ पा लेगा, जिसकी वह कामना करता है?
आख़िरत और दुनिया का मालिक तो अल्लाह ही है
आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते है, उनकी सिफ़ारिश कुछ काम नहीं आएगी; यदि काम आ सकती है तो इसके पश्चात ही कि अल्लाह अनुमति दे, जिसे चाहे और पसन्द करे।
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