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Juz 27 Page 530 / 604 Hizb 53

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 28

    "और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। हर एक पीने की बारी पर बारीवाला उपस्थित होगा।"

  2. 29

    अन्ततः उन्होंने अपने साथी को पुकारा, तो उसने ज़िम्मा लिया फिर उसने उसकी कूचें काट दी

  3. 30

    फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?

  4. 31

    हमने उनपर एक धमाका छोड़ा, फिर वे बाड़ लगानेवाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह चूरा होकर रह गए

  5. 32

    हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला?

  6. 33

    लूत की क़ौम ने भी चेतावनियों को झुठलाया

  7. 34

    हमने लूत के घरवालों के सिवा उनपर पथराव करनेवाली तेज़ वायु भेजी।

  8. 35

    हमने अपनी विशेष अनुकम्पा से प्रातःकाल उन्हें बचा लिया। हम इसी तरह उस व्यक्ति को बदला देते है जो कृतज्ञता दिखाए

  9. 36

    उसने जो उन्हें हमारी पकड़ से सावधान कर दिया था। किन्तु वे चेतावनियों के विषय में संदेह करते रहे

  10. 37

    उन्होंने उसे फुसलाकर उसके पास से उसके अतिथियों को बलाना चाहा। अन्ततः हमने उसकी आँखें मेट दीं, "लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का!"

  11. 38

    सुबह सवेरे ही एक अटल यातना उनपर आ पहुँची,

  12. 39

    "लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का!"

  13. 40

    और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?

  14. 41

    और फ़िरऔनियों के पास चेतावनियाँ आई;

  15. 42

    उन्होंने हमारी सारी निशानियों को झुठला दिया। अन्ततः हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार एक ज़बरदस्त प्रभुत्वशाली पकड़ता है

  16. 43

    क्या तुम्हारे काफ़िर कुछ उन लोगो से अच्छे है या किताबों में तुम्हारे लिए कोई छुटकारा लिखा हुआ है?

  17. 44

    या वे कहते है, "और हम मुक़ाबले की शक्ति रखनेवाले एक जत्था है?"

  18. 45

    शीघ्र ही वह जत्था पराजित होकर रहेगा और वे पीठ दिखा जाएँगे

  19. 46

    नहीं, बल्कि वह घड़ी है, जिसका समय उनके लिए नियत है और वह बड़ी आपदावाली और कटु घड़ी है!

  20. 47

    निस्संदेह, अपराधी लोग गुमराही और दीवानेपन में पड़े हुए है

  21. 48

    जिस दिन वे अपने मुँह के बल आग में घसीटे जाएँगे, "चखो मज़ा आग की लपट का!"

  22. 49

    निश्चय ही हमने हर चीज़ एक अंदाज़े के साथ पैदा की है

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