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Juz 27 Page 531 / 604 Hizb 53
Surah الرحمن
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 50

    और हमारा आदेश (और काम) तो बस एक दम की बात होती है जैसे आँख का झपकना

  2. 51

    और हम तुम्हारे जैसे लोगों को विनष्ट कर चुके है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?

  3. 52

    जो कुछ उन्होंने किया है, वह पन्नों में अंकित है

  4. 53

    और हर छोटी और बड़ी चीज़ लिखित है

  5. 54

    निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ो और नहरों के बीच होंगे,

  6. 55

    प्रतिष्ठित स्थान पर, प्रभुत्वशाली सम्राट के निकट

  7. 1

    रहमान ने

  8. 2

    क़ुरआन सिखाया;

  9. 3

    उसी ने मनुष्य को पैदा किया;

  10. 4

    उसे बोलना सिखाया;

  11. 5

    सूर्य और चन्द्रमा एक हिसाब के पाबन्द है;

  12. 6

    और तारे और वृक्ष सजदा करते है;

  13. 7

    उसने आकाश को ऊँचा किया और संतुलन स्थापित किया -

  14. 8

    कि तुम भी तुला में सीमा का उल्लंघन न करो

  15. 9

    न्याय के साथ ठीक-ठीक तौलो और तौल में कमी न करो। -

  16. 10

    और धरती को उसने सृष्टल प्राणियों के लिए बनाया;

  17. 11

    उसमें स्वादिष्ट फल है और खजूर के वृक्ष है, जिनके फल आवरणों में लिपटे हुए है,

  18. 12

    और भुसवाले अनाज भी और सुगंधित बेल-बूटा भी

  19. 13

    तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे?

  20. 14

    उसने मनुष्य को ठीकरी जैसी खनखनाती हुए मिट्टी से पैदा किया;

  21. 15

    और जिन्न को उसने आग की लपट से पैदा किया

  22. 16

    फिर तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे?

  23. 17

    वह दो पूर्व का रब है और दो पश्चिम का रब भी।

  24. 18

    फिर तुम दोनों अपने रब की महानताओं में से किस-किस को झुठलाओगे?

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