Al Madinah Quran
Language
The Inevitable Page 536
Home
Juz 27 Page 536 / 604 Hizb 54

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 51

    "फिर तुम ऐ गुमराहो, झुठलानेवालो!

  2. 52

    ज़क्कूम के वृक्ष में से खाओंगे;

  3. 53

    "और उसी से पेट भरोगे;

  4. 54

    "और उसके ऊपर से खौलता हुआ पानी पीओगे;

  5. 55

    "और तौस लगे ऊँट की तरह पीओगे।"

  6. 56

    यह बदला दिए जाने के दिन उनका पहला सत्कार होगा

  7. 57

    हमने तुम्हें पैदा किया; फिर तुम सच क्यों नहीं मानते?

  8. 58

    तो क्या तुमने विचार किया जो चीज़ तुम टपकाते हो?

  9. 59

    क्या तुम उसे आकार देते हो, या हम है आकार देनेवाले?

  10. 60

    हमने तुम्हारे बीच मृत्यु को नियत किया है और हमारे बस से यह बाहर नहीं है

  11. 61

    कि हम तुम्हारे जैसों को बदल दें और तुम्हें ऐसी हालत में उठा खड़ा करें जिसे तुम जानते नहीं

  12. 62

    तुम तो पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम ध्यान क्यों नहीं देते?

  13. 63

    फिर क्या तुमने देखा तो कुछ तुम खेती करते हो?

  14. 64

    क्या उसे तुम उगाते हो या हम उसे उगाते है?

  15. 65

    यदि हम चाहें तो उसे चूर-चूर कर दें। फिर तुम बातें बनाते रह जाओ

  16. 66

    कि "हमपर उलटा डाँड पड़ गया,

  17. 67

    बल्कि हम वंचित होकर रह गए!"

  18. 68

    फिर क्या तुमने उस पानी को देखा जिसे तुम पीते हो?

  19. 69

    क्या उसे बादलों से तुमने पानी बरसाया या बरसानेवाले हम है?

  20. 70

    यदि हम चाहें तो उसे अत्यन्त खारा बनाकर रख दें। फिर तुम कृतज्ञता क्यों नहीं दिखाते?

  21. 71

    फिर क्या तुमने उस आग को देखा जिसे तुम सुलगाते हो?

  22. 72

    क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है या पैदा करनेवाले हम है?

  23. 73

    हमने उसे एक अनुस्मृति और मरुभुमि के मुसाफ़िरों और ज़रूरतमन्दों के लिए लाभप्रद बनाया

  24. 74

    अतः तुम अपने महान रब के नाम की तसबीह करो

  25. 75

    अतः नहीं! मैं क़समों खाता हूँ सितारों की स्थितियों की -

  26. 76

    और यह बहुत बड़ी गवाही है, यदि तुम जानो -

Reading

Display settings

Quran text size
Appearance
0:00/0:00