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Juz 27 Page 537 / 604 Hizb 54
Surah الحديد
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 77

    निश्चय ही यह प्रतिष्ठित क़ुरआन है

  2. 78

    एक सुरक्षित किताब में अंकित है।

  3. 79

    उसे केवल पाक-साफ़ व्यक्ति ही हाथ लगाते है

  4. 80

    उसका अवतरण सारे संसार के रब की ओर से है।

  5. 81

    फिर क्या तुम उस वाणी के प्रति उपेक्षा दर्शाते हो?

  6. 82

    और तुम इसको अपनी वृत्ति बना रहे हो कि झुठलाते हो?

  7. 83

    फिर ऐसा क्यों नहीं होता, जबकि प्राण कंठ को आ लगते है

  8. 84

    और उस समय तुम देख रहे होते हो -

  9. 85

    और हम तुम्हारी अपेक्षा उससे अधिक निकट होते है। किन्तु तुम देखते नहीं –

  10. 86

    फिर ऐसा क्यों नहीं होता कि यदि तुम अधीन नहीं हो

  11. 87

    तो उसे (प्राण को) लौटा दो, यदि तुम सच्चे हो

  12. 88

    फिर यदि वह (अल्लाह के) निकटवर्तियों में से है;

  13. 89

    तो (उसके लिए) आराम, सुख-सामग्री और सुगंध है, और नेमतवाला बाग़ है

  14. 90

    और यदि वह भाग्यशालियों में से है,

  15. 91

    तो "सलाम है तुम्हें कि तुम सौभाग्यशाली में से हो।"

  16. 92

    किन्तु यदि वह झुठलानेवालों, गुमराहों में से है;

  17. 93

    तो उसका पहला सत्कार खौलते हुए पानी से होगा

  18. 94

    फिर भड़कती हुई आग में उन्हें झोंका जाना है

  19. 95

    निस्संदेह यही विश्वसनीय सत्य है

  20. 96

    अतः तुम अपने महान रब की तसबीह करो

  21. 1

    अल्लाह की तसबीह की हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है। वही प्रभुत्वशाली, तत्वशाली है

  22. 2

    आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है। वही जीवन प्रदान करता है और मृत्यु देता है, और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है

  23. 3

    वही आदि है और अन्त भी और वही व्यक्त है और अव्यक्त भी। और वह हर चीज़ को जानता है

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