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Juz 29 Page 565 / 604 Hizb 57

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 17

    हमने उन्हें परीक्षा में डाला है जैसे बाग़वालों को परीक्षा में डाला था, जबकि उन्होंने क़सम खाई कि वे प्रातःकाल अवश्य उस (बाग़) के फल तोड़ लेंगे

  2. 18

    और वे इसमें छूट की कोई गुंजाइश नहीं रख रहे थे

  3. 19

    अभी वे सो ही रहे थे कि तुम्हारे रब की ओर से गर्दिश का एक झोंका आया

  4. 20

    और वह ऐसा हो गया जैसे कटी हुई फ़सल

  5. 21

    फिर प्रातःकाल होते ही उन्होंने एक-दूसरे को आवाज़ दी

  6. 22

    कि "यदि तुम्हें फल तोड़ना है तो अपनी खेती पर सवेरे ही पहुँचो।"

  7. 23

    अतएव वे चुपके-चुपके बातें करते हुए चल पड़े

  8. 24

    कि आज वहाँ कोई मुहताज तुम्हारे पास न पहुँचने पाए

  9. 25

    और वे आज तेज़ी के साथ चले मानो (मुहताजों को) रोक देने की उन्हें सामर्थ्य प्राप्त है

  10. 26

    किन्तु जब उन्होंने उसको देखा, कहने लगे, "निश्चय ही हम भटक गए है।

  11. 27

    नहीं, बल्कि हम वंचित होकर रह गए।"

  12. 28

    उनमें जो सबसे अच्छा था कहने लगा, "क्या मैंने तुमसे कहा नहीं था? तुम तसबीह क्यों नहीं करते?"

  13. 29

    वे पुकार उठे, "महान और उच्च है हमारा रब! निश्चय ही हम ज़ालिम थे।"

  14. 30

    फिर वे परस्पर एक-दूसरे की ओर रुख़ करके लगे एक-दूसरे को मलामत करने।

  15. 31

    उन्होंने कहा, "अफ़सोस हम पर! निश्चय ही हम सरकश थे।

  16. 32

    "आशा है कि हमारा रब बदले में हमें इससे अच्छा प्रदान करे। हम अपने रब की ओर उन्मुख है।"

  17. 33

    यातना ऐसी ही होती है, और आख़िरत की यातना तो निश्चय ही इससे भी बड़ी है, काश वे जानते!

  18. 34

    निश्चय ही डर रखनेवालों के लिए उनके रब के यहाँ नेमत भरी जन्नतें है

  19. 35

    तो क्या हम मुस्लिमों (आज्ञाकारियों) को अपराधियों जैसा कर देंगे?

  20. 36

    तुम्हें क्या हो गया है, कैसा फ़ैसला करते हो?

  21. 37

    क्या तुम्हारे पास कोई किताब है जिसमें तुम पढ़ते हो

  22. 38

    कि उसमें तुम्हारे लिए वह कुछ है जो तुम पसन्द करो?

  23. 39

    या तुमने हमसे क़समें ले रखी है जो क़ियामत के दिन तक बाक़ी रहनेवाली है कि तुम्हारे लिए वही कुछ है जो तुम फ़ैसला करो!

  24. 40

    उनसे पूछो, "उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है!

  25. 41

    या उनके ठहराए हुए कुछ साझीदार है? फिर तो यह चाहिए कि वे अपने साझीदारों को ले आएँ, यदि वे सच्चे है

  26. 42

    जिस दिन पिंडली खुल जाएगी और वे सजदे के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे (सजदा) न कर सकेंगे

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