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Juz 29 Page 566 / 604 Hizb 57
Surah الحاقة
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 43

    उनकी निगाहें झुकी हुई होंगी, ज़िल्लत (अपमान) उनपर छा रही होगी। उन्हें उस समय भी सजदा करने के लिए बुलाया जाता था जब वे भले-चंगे थे

  2. 44

    अतः तुम मुझे छोड़ दो और उसको जो इस वाणी को झुठलाता है। हम ऐसों को क्रमशः (विनाश की ओर) ले जाएँगे, ऐसे तरीक़े से कि वे नहीं जानते

  3. 45

    मैं उन्हें ढील दे रहा हूँ। निश्चय ही मेरी चाल बड़ी मज़बूत है

  4. 46

    (क्या वे यातना ही चाहते हैं) या तुम उनसे कोई बदला माँग रहे हो कि वे तावान के बोझ से दबे जाते हों?

  5. 47

    या उनके पास परोक्ष का ज्ञान है तो वे लिख रहे हैं?

  6. 48

    तो अपने रब के आदेश हेतु धैर्य से काम लो और मछलीवाले (यूनुस अलै॰) की तरह न हो जाना, जबकि उसने पुकारा था इस दशा में कि वह ग़म में घुट रहा था।

  7. 49

    यदि उसके रब की अनुकम्पा उसके साथ न हो जाती तो वह अवश्य ही चटियल मैदान में बुरे हाल में डाल दिया जाता।

  8. 50

    अन्ततः उसके रब ने उसे चुन लिया और उसे अच्छे लोगों में सम्मिलित कर दिया

  9. 51

    जब वे लोग, जिन्होंने इनकार किया, ज़िक्र (क़ुरआन) सुनते है और कहते है, "वह तो दीवाना है!" तो ऐसा लगता है कि वे अपनी निगाहों के ज़ोर से तुम्हें फिसला देंगे

  10. 52

    हालाँकि वह सारे संसार के लिए एक अनुस्मृति है

  11. 1

    होकर रहनेवाली!

  12. 2

    क्या है वह होकर रहनेवाली?

  13. 3

    और तुम क्या जानो कि क्या है वह होकर रहनेवाली?

  14. 4

    समूद और आद ने उस खड़खड़ा देनेवाली (घटना) को झुठलाया,

  15. 5

    फिर समूद तो एक हद से बढ़ जानेवाली आपदा से विनष्ट किए गए

  16. 6

    और रहे आद, तो वे एक अनियंत्रित प्रचंड वायु से विनष्ट कर दिए गए

  17. 7

    अल्लाह ने उसको सात रात और आठ दिन तक उन्मूलन के उद्देश्य से उनपर लगाए रखा। तो लोगों को तुम देखते कि वे उसमें पछाड़े हुए ऐसे पड़े है मानो वे खजूर के जर्जर तने हों

  18. 8

    अब क्या तुम्हें उनमें से कोई शेष दिखाई देता है?

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