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الحاقة · Ayah 9وَجَآءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُۥ وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ بِٱلْخَاطِئَةِ
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الحاقة · Ayah 10فَعَصَوْا۟ رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةً رَّابِيَةً
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الحاقة · Ayah 11إِنَّا لَمَّا طَغَا ٱلْمَآءُ حَمَلْنَـٰكُمْ فِى ٱلْجَارِيَةِ
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الحاقة · Ayah 12لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَآ أُذُنٌ وَٰعِيَةٌ
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الحاقة · Ayah 14وَحُمِلَتِ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةً وَٰحِدَةً
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الحاقة · Ayah 17وَٱلْمَلَكُ عَلَىٰٓ أَرْجَآئِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍ ثَمَـٰنِيَةٌ
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الحاقة · Ayah 19فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقْرَءُوا۟ كِتَـٰبِيَهْ
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الحاقة · Ayah 24كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَآ أَسْلَفْتُمْ فِى ٱلْأَيَّامِ ٱلْخَالِيَةِ
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الحاقة · Ayah 25وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِشِمَالِهِۦ فَيَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى لَمْ أُوتَ كِتَـٰبِيَهْ
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الحاقة · Ayah 32ثُمَّ فِى سِلْسِلَةٍ ذَرْعُهَا سَبْعُونَ ذِرَاعًا فَٱسْلُكُوهُ
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Ayah meanings
Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21
और फ़िरऔन ने और उससे पहले के लोगों ने और तलपट हो जानेवाली बस्तियों ने यह ख़ता की
उन्होंने अपने रब के रसूल की अवज्ञा की तो उसने उन्हें ऐसी पकड़ में ले लिया जो बड़ी कठोर थी
जब पानी उमड़ आया तो हमने तुम्हें प्रवाहित नौका में सवार किया;
ताकि उसे तुम्हारे लिए हम शिक्षाप्रद यादगार बनाएँ और याद रखनेवाले कान उसे सुरक्षित रखें
तो याद रखो जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी,
और धरती और पहाड़ों को उठाकर एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा
तो उस दिन घटित होनेवाली घटना घटित हो जाएगी,
और आकाश फट जाएगा और उस दिन उसका बन्धन ढीला पड़ जाएगा,
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे और उस दिन तुम्हारे रब के सिंहासन को आठ अपने ऊपर उठाए हुए होंगे
उस दिन तुम लोग पेश किए जाओगे, तुम्हारी कोई छिपी बात छिपी न रहेगी
फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा, "लो पढ़ो, मेरा कर्म-पत्र!
"मैं तो समझता ही था कि मुझे अपना हिसाब मिलनेवाला है।"
अतः वह सुख और आनन्दमय जीवन में होगा;
उच्च जन्नत में,
जिसके फलों के गुच्छे झुके होंगे
मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुमने बीते दिनों में किए है
और रहा वह क्यक्ति जिसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, वह कहेगा, "काश, मेरा कर्म-पत्र मुझे न दिया जाता
और मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!
"ऐ काश, वह (मृत्यु) समाप्त करनेवाली होती!
"मेरा माल मेरे कुछ काम न आया,
"मेरा ज़ोर (सत्ता) मुझसे जाता रहा!"
"पकड़ो उसे और उसकी गरदन में तौक़ डाल दो,
"फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो,
"फिर उसे एक ऐसी जंजीर में जकड़ दो जिसकी माप सत्तर हाथ है
"वह न तो महिमावान अल्लाह पर ईमान रखता था
और न मुहताज को खाना खिलाने पर उभारता था
"अतः आज उसका यहाँ कोई घनिष्ट मित्र नहीं,
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