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Juz 29 Page 574 / 604 Hizb 58
Surah المزمل
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 1

    ऐ कपड़े में लिपटनेवाले!

  2. 2

    रात को उठकर (नमाज़ में) खड़े रहा करो - सिवाय थोड़ा हिस्सा -

  3. 3

    आधी रात

  4. 4

    या उससे कुछ थोड़ा कम कर लो या उससे कुछ अधिक बढ़ा लो और क़ुरआन को भली-भाँति ठहर-ठहरकर पढ़ो। -

  5. 5

    निश्चय ही हम तुमपर एक भारी बात डालनेवाले है

  6. 6

    निस्संदेह रात का उठना अत्यन्त अनुकूलता रखता है और बात भी उसमें अत्यन्त सधी हुई होती है

  7. 7

    निश्चय ही तुम्हार लिए दिन में भी (तसबीह की) बड़ी गुंजाइश है। -

  8. 8

    और अपने रब के नाम का ज़िक्र किया करो और सबसे कटकर उसी के हो रहो।

  9. 9

    वह पूर्व और पश्चिम का रब है, उसके सिवा कोई इष्ट-पूज्य नहीं, अतः तुम उसी को अपना कार्यसाधक बना लो

  10. 10

    और जो कुछ वे कहते है उसपर धैर्य से काम लो और भली रीति से उनसे अलग हो जाओ

  11. 11

    और तुम मुझे और झूठलानेवाले सुख-सम्पन्न लोगों को छोड़ दो और उन्हें थोड़ी मुहलत दो

  12. 12

    निश्चय ही हमारे पास बेड़ियाँ है और भड़कती हुई आग

  13. 13

    और गले में अटकनेवाला भोजन है और दुखद यातना,

  14. 14

    जिस दिन धरती और पहाड़ काँप उठेंगे, और पहाड़ रेत के ऐसे ढेर होकर रह जाएगे जो बिखरे जा रहे होंगे

  15. 15

    निश्चय ही हुमने तुम्हारी ओर एक रसूल तुमपर गवाह बनाकर भेजा है, जिस प्रकार हमने फ़़िरऔन की ओर एक रसूल भेजा था

  16. 16

    किन्तु फ़िरऔन ने रसूल की अवज्ञा कि, तो हमने उसे पकड़ लिया और यह पकड़ सख़्त वबाल थी

  17. 17

    यदि तुमने इनकार किया तो उस दिन से कैसे बचोगे जो बच्चों को बूढा कर देगा?

  18. 18

    आकाश उसके कारण फटा पड़ रहा है, उसका वादा तो पूरा ही होना है

  19. 19

    निश्चय ही यह एक अनुस्मृति है। अब जो चाहे अपने रब की ओर मार्ग ग्रहण कर ले

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