Al Madinah Quran
Language
Man Page 580
Home
Juz 29 Page 580 / 604 Hizb 58
Surah المرسلات
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 26

    और रात के कुछ हिस्से में भी उसे सजदा करो, लम्बी-लम्बी रात तक उसकी तसबीह करते रहो

  2. 27

    निस्संदेह ये लोग शीघ्र प्राप्त होनेवाली चीज़ (संसार) से प्रेम रखते है और एक भारी दिन को अपने परे छोड़ रह है

  3. 28

    हमने उन्हें पैदा किया और उनके जोड़-बन्द मज़बूत किेए और हम जब चाहे उन जैसों को पूर्णतः बदल दें

  4. 29

    निश्चय ही यह एक अनुस्मृति है, अब जो चाहे अपने रब की ओर मार्ग ग्रहण कर ले

  5. 30

    और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि अल्लाह चाहे। निस्संदेह अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है

  6. 31

    वह जिसे चाहता है अपनी दयालुता में दाख़िल करता है। रहे ज़ालिम, तो उनके लिए उसने दुखद यातना तैयार कर रखी है

  7. 1

    साक्षी है वे (हवाएँ) जिनकी चोटी छोड़ दी जाती है

  8. 2

    फिर ख़ूब तेज़ हो जाती है,

  9. 3

    और (बादलों को) उठाकर फैलाती है,

  10. 4

    फिर मामला करती है अलग-अलग,

  11. 5

    फिर पेश करती है याददिहानी

  12. 6

    इल्ज़ाम उतारने या चेतावनी देने के लिए,

  13. 7

    निस्संदेह जिसका वादा तुमसे किया जा रहा है वह निश्चित ही घटित होकर रहेगा

  14. 8

    अतः जब तारे विलुप्त (प्रकाशहीन) हो जाएँगे,

  15. 9

    और जब आकाश फट जाएगा

  16. 10

    और पहाड़ चूर्ण-विचूर्ण होकर बिखर जाएँगे;

  17. 11

    और जब रसूलों का हाल यह होगा कि उन का समय नियत कर दिया गया होगा -

  18. 12

    किस दिन के लिए वे टाले गए है?

  19. 13

    फ़ैसले के दिन के लिए

  20. 14

    और तुम्हें क्या मालूम कि वह फ़ैसले का दिन क्या है? -

  21. 15

    तबाही है उस दिन झूठलाने-वालों की!

  22. 16

    क्या ऐसा नहीं हुआ कि हमने पहलों को विनष्ट किया?

  23. 17

    फिर उन्हीं के पीछे बादवालों को भी लगाते रहे?

  24. 18

    अपराधियों के साथ हम ऐसा ही करते है

  25. 19

    तबाही है उस दिन झुठलानेवालो की!

Reading

Display settings

Quran text size
Appearance
0:00/0:00