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الانسان · Ayah 26وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَٱسْجُدْ لَهُۥ وَسَبِّحْهُ لَيْلًا طَوِيلًا
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الانسان · Ayah 27إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ يُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ وَيَذَرُونَ وَرَآءَهُمْ يَوْمًا ثَقِيلًا
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الانسان · Ayah 28نَّحْنُ خَلَقْنَـٰهُمْ وَشَدَدْنَآ أَسْرَهُمْ ۖ وَإِذَا شِئْنَا بَدَّلْنَآ أَمْثَـٰلَهُمْ تَبْدِيلًا
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الانسان · Ayah 29إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًا
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الانسان · Ayah 30وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا
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الانسان · Ayah 31يُدْخِلُ مَن يَشَآءُ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ وَٱلظَّـٰلِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۢا
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Ayah meanings
Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21
और रात के कुछ हिस्से में भी उसे सजदा करो, लम्बी-लम्बी रात तक उसकी तसबीह करते रहो
निस्संदेह ये लोग शीघ्र प्राप्त होनेवाली चीज़ (संसार) से प्रेम रखते है और एक भारी दिन को अपने परे छोड़ रह है
हमने उन्हें पैदा किया और उनके जोड़-बन्द मज़बूत किेए और हम जब चाहे उन जैसों को पूर्णतः बदल दें
निश्चय ही यह एक अनुस्मृति है, अब जो चाहे अपने रब की ओर मार्ग ग्रहण कर ले
और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि अल्लाह चाहे। निस्संदेह अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है
वह जिसे चाहता है अपनी दयालुता में दाख़िल करता है। रहे ज़ालिम, तो उनके लिए उसने दुखद यातना तैयार कर रखी है
साक्षी है वे (हवाएँ) जिनकी चोटी छोड़ दी जाती है
फिर ख़ूब तेज़ हो जाती है,
और (बादलों को) उठाकर फैलाती है,
फिर मामला करती है अलग-अलग,
फिर पेश करती है याददिहानी
इल्ज़ाम उतारने या चेतावनी देने के लिए,
निस्संदेह जिसका वादा तुमसे किया जा रहा है वह निश्चित ही घटित होकर रहेगा
अतः जब तारे विलुप्त (प्रकाशहीन) हो जाएँगे,
और जब आकाश फट जाएगा
और पहाड़ चूर्ण-विचूर्ण होकर बिखर जाएँगे;
और जब रसूलों का हाल यह होगा कि उन का समय नियत कर दिया गया होगा -
किस दिन के लिए वे टाले गए है?
फ़ैसले के दिन के लिए
और तुम्हें क्या मालूम कि वह फ़ैसले का दिन क्या है? -
तबाही है उस दिन झूठलाने-वालों की!
क्या ऐसा नहीं हुआ कि हमने पहलों को विनष्ट किया?
फिर उन्हीं के पीछे बादवालों को भी लगाते रहे?
अपराधियों के साथ हम ऐसा ही करते है
तबाही है उस दिन झुठलानेवालो की!
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