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Juz 30 Page 592 / 604 Hizb 60
Surah الغاشية
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 11

    किन्तु उससे कतराएगा वह अत्यन्त दुर्भाग्यवाला,

  2. 12

    जो बड़ी आग में पड़ेगा,

  3. 13

    फिर वह उसमें न मरेगा न जिएगा

  4. 14

    सफल हो गया वह जिसने अपने आपको निखार लिया,

  5. 15

    और अपने रब के नाम का स्मरण किया, अतः नमाज़ अदा की

  6. 16

    नहीं, बल्कि तुम तो सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो,

  7. 17

    हालाँकि आख़िरत अधिक उत्तम और शेष रहनेवाली है

  8. 18

    निस्संदेह यही बात पहले की किताबों में भी है;

  9. 19

    इबराईम और मूसा की किताबों में

  10. 1

    क्या तुम्हें उस छा जानेवाली की ख़बर पहुँची है?

  11. 2

    उस दिन कितने ही चेहरे गिरे हुए होंगे,

  12. 3

    कठिन परिश्रम में पड़े, थके-हारे

  13. 4

    दहकती आग में प्रवेश करेंगे

  14. 5

    खौलते हुए स्रोत से पिएँगे,

  15. 6

    उनके लिए कोई खाना न होगा सिवाय एक प्रकार के ज़री के,

  16. 7

    जो न पुष्ट करे और न भूख मिटाए

  17. 8

    उस दिन कितने ही चेहरे प्रफुल्लित और सौम्य होंगे,

  18. 9

    अपने प्रयास पर प्रसन्न,

  19. 10

    उच्च जन्नत में,

  20. 11

    जिसमें कोई व्यर्थ बात न सुनेंगे

  21. 12

    उसमें स्रोत प्रवाहित होगा,

  22. 13

    उसमें ऊँची-ऊँची मसनदें होगी,

  23. 14

    प्याले ढंग से रखे होंगे,

  24. 15

    क्रम से गाव तकिए लगे होंगे,

  25. 16

    और हर ओर क़ालीने बिछी होंगी

  26. 17

    फिर क्या वे ऊँट की ओर नहीं देखते कि कैसा बनाया गया?

  27. 18

    और आकाश की ओर कि कैसा ऊँचा किया गया?

  28. 19

    और पहाड़ो की ओर कि कैसे खड़े किए गए?

  29. 20

    और धरती की ओर कि कैसी बिछाई गई?

  30. 21

    अच्छा तो नसीहत करो! तुम तो बस एक नसीहत करनेवाले हो

  31. 22

    तुम उनपर कोई दरोग़ा नही हो

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