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Juz 30 Page 595 / 604 Hizb 60
Surah الشمس
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
Surah الليل
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 19

    रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयातों का इनकार किया, वे दुर्भाग्यशाली लोग है

  2. 20

    उनपर आग होगी, जिसे बन्द कर दिया गया होगा

  3. 1

    साक्षी है सूर्य और उसकी प्रभा,

  4. 2

    और चन्द्रमा जबकि वह उनके पीछे आए,

  5. 3

    और दिन, जबकि वह उसे प्रकट कर दे,

  6. 4

    और रात, जबकि वह उसको ढाँक ले

  7. 5

    और आकाश और जैसा कुछ उसे उठाया,

  8. 6

    और धरती और जैसा कुछ उसे बिछाया

  9. 7

    और आत्मा और जैसा कुछ उसे सँवारा

  10. 8

    फिर उसके दिल में डाली उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी

  11. 9

    सफल हो गया जिसने उसे विकसित किया

  12. 10

    और असफल हुआ जिसने उसे दबा दिया

  13. 11

    समूद ने अपनी सरकशी से झुठलाया,

  14. 12

    जब उनमें का सबसे बड़ा दुर्भाग्यशाली उठ खड़ा हुआ,

  15. 13

    तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा, "सावधान, अल्लाह की ऊँटनी और उसके पिलाने (की बारी) से।"

  16. 14

    किन्तु उन्होंने उसे झुठलाया और उस ऊँटनी की कूचें काट डाली। अन्ततः उनके रब ने उनके गुनाह के कारण उनपर तबाही डाल दी और उन्हें बराबर कर दिया

  17. 15

    और उसे उसके परिणाम का कोई भय नहीं

  18. 1

    साक्षी है रात जबकि वह छा जाए,

  19. 2

    और दिन जबकि वह प्रकाशमान हो,

  20. 3

    और नर और मादा का पैदा करना,

  21. 4

    कि तुम्हारा प्रयास भिन्न-भिन्न है

  22. 5

    तो जिस किसी ने दिया और डर रखा,

  23. 6

    और अच्छी चीज़ की पुष्टि की,

  24. 7

    हम उस सहज ढंग से उस चीज का पात्र बना देंगे, जो सहज और मृदुल (सुख-साध्य) है

  25. 8

    रहा वह व्यक्ति जिसने कंजूसी की और बेपरवाही बरती,

  26. 9

    और अच्छी चीज़ को झुठला दिया,

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