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Juz 30 Page 598 / 604 Hizb 60
Surah القدر
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
Surah البينة
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Ayah meanings

Muhammad Farooq Khan & Muhammad Ahmed

हिन्दी

Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed · Tanzil Project · Version tanzil-2026-09-21

  1. 13

    तुम्हारा क्या विचार है? यदि उस (रोकनेवाले) ने झुठलाया और मुँह मोड़ा (तो उसके बुरा होने में क्या संदेह है) -

  2. 14

    क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है?

  3. 15

    कदापि नहीं, यदि वह बाज़ न आया तो हम चोटी पकड़कर घसीटेंगे,

  4. 16

    झूठी, ख़ताकार चोटी

  5. 17

    अब बुला ले वह अपनी मजलिस को!

  6. 18

    हम भी बुलाए लेते है सिपाहियों को

  7. 19

    कदापि नहीं, उसकी बात न मानो और सजदे करते और क़रीब होते रहो

  8. 1

    हमने इसे क़द्र की रात में अवतरित किया

  9. 2

    और तुम्हें क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है?

  10. 3

    क़द्र की रात उत्तम है हज़ार महीनों से,

  11. 4

    उसमें फ़रिश्तें और रूह हर महत्वपूर्ण मामलें में अपने रब की अनुमति से उतरते है

  12. 5

    वह रात पूर्णतः शान्ति और सलामती है, उषाकाल के उदय होने तक

  13. 1

    किताबवालों और मुशरिकों (बहुदेववादियों) में से जिन लोगों ने इनकार किया वे कुफ़्र (इनकार) से अलग होनेवाले नहीं जब तक कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण न आ जाए;

  14. 2

    अल्लाह की ओर से एक रसूल पवित्र पृष्ठों को पढ़ता हुआ;

  15. 3

    जिनमें ठोस और ठीक आदेश अंकित हों,

  16. 4

    हालाँकि जिन्हें किताब दी गई थी। वे इसके पश्चात फूट में पड़े कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ चुका था

  17. 5

    और उन्हें आदेश भी बस यही दिया गया था कि वे अल्लाह की बन्दगी करे निष्ठा एवं विनयशीलता को उसके लिए विशिष्ट करके, बिलकुल एकाग्र होकर, और नमाज़ की पाबन्दी करें और ज़कात दे। और यही है सत्यवादी समुदाय का धर्म

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